यह कहानियों से परे एक कहानी है। यह कहानी है राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के परिजनों की। गांधी जी के 154 वंशजों में से एक हैं उनकी पर-पोती मेधा गांधी। लोग जानना चाहते हैं कि आखिर मेधा ने ऐसा क्या कर दिया है कि उनकी तस्वीरें वायरल हो रही हैं। बापू की पर-पोती मेधा गांधी अमरीका में रहती हैं। वे सोशल मीडिया में काफी एक्टिव हैं। फेसबुक में उनकी ग्लैमरस तस्वीरें हैं।

 

कौन हैं मेधा गांधी :-

बापू के बड़े पोते कांतिलाल की बेटी हैं मेधा। कांतिलाल बापू के बड़े बेटे हीरालाल गांधी के बेटे थे। मेधा का परिवार अमरीका में रहता है। मेधा गांधी अमरीका में बड़ी कॉमेडी राइटर हैं। वे पेरोडी प्रोड्यूसर के रूप में मशहूर हैं। मेधा गांधी अपनी आकर्षक जीवन शैली के लिए भी जानी जाती हैं। इनकी शिक्षा-दीक्षा और परवरिश अमरीका में हुई। यहीं के एक विश्वविद्यालय से इन्होंने शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद, वह कॉमेडी राइटर, पेरोडी प्रोड्यूसर के रूप में काम कर रही हैं। मुखर प्रतिभा और स्पष्ट वक्ता के रूप में भी उनकी चर्चा होती है। ‘डेव एंड शो’ अमरीका का सबसे प्रसिद्ध शो है। मेधा इसकी निर्माता हैं। उनके दूसरे शो का नाम है ‘मैटी इन द मॉर्निंग। अमरीका में रहते हुए भी मेधा अपने दादा के आदर्शों को नहीं भूली हैं, वो उनके बताए अहिंसा के नियमों को मानती हैं, वो अक्सर सोशल काम से जुड़े मुद्दों के इवेंट में दिखती हैं।

 

हीरालाल के बारे में :-

कहा जाता है कि गांधी जी के बड़े बड़े बेटे हीरालाल गांधी जी की तमाम बातों से इत्तफाक नहीं रखते थे। कई मुद्दों पर उनके गांधी जी से मतभेद थे। उनके अंदर कई बुरी आदते भी थीं। मसलन, वे गांधी परिवार से इतर शराब पीते थे। यही नहीं गांधी जी के विरोध में उन्होंने इस्लाम भी अपना लिया था।

 

कांतिलाल गांधी जी के भक्त थे :-

अपने पिता हीरालाल से उलट कांतिलाल बापू के प्रिय थे। उन्हें गांधी जी की नीतियां अच्छी लगती थीं। इसीलिए कांतिलाल अपने दादा से काफी प्रभावित। 12 मार्च 1930 से महात्मा गांधी ने अहमदाबाद के साबरमती आश्रम से दांडी कूच की शुरुआत की थी, उस कूच में कांतिलाल भी शामिल हुए थे तब उनकी उम्र 20 साल थी।

 

छह देशों में फैला है महात्मा गांधी का परिवार :-

शायद यह जानकर आपको आश्चर्य हो लेकिन सत्य यही है कि आज महात्मा गांधी के 154 वंशज भारत के अलावा 6 विभिन्न देशों में रहते हैं। उनके बेटे हरिलाल के पुत्र कांतिलाल भी इनमें से एक थे। स्वतंत्रता के बाद, कांतिलाल और उनका पूरा परिवार अमरीका में बस गया।

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